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कालिकन धाम कहाँ है?..

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भारत के मन्दिर~                       कालिकन धाम, अमेठी https://youtu.be/fNyEh5Ut2Nw?si=ljhEQsHRA1X0CxdQ प्राचीन अवध प्रांत अपने महान राजाओं और भगवान श्रीराम के कारण से विशेष प्रसिद्ध रहा है। उसकी प्रसिद्धि का एक अन्य कारण गांव-गांव, छोटे-मोटे नगरों में विविध मंदिरों का होना भी है। ये मंदिर प्रायः स्थानीय या ग्राम-देवियों/देवताओं के केंद्र हैं। ग्रामीण जनता के लिए ये धार्मिक आस्था/प्रार्थना-केंद्र, शांतिस्थल, मेलाकेन्द्र आदि के रूप में आज भी जीवन्त रहते हैं। इन्हीं मंदिरों में एक विशिष्ट मन्दिर पूर्व अवध प्रान्त के आधुनिक अमेठी जनपद/नगर से 12 किलोमीटर दूर संग्रामपुर में स्थित एक प्राचीन मंदिर है। इसे कालिकन धाम मन्दिर के नाम से जाना जाता है। लोगों की मान्यता है कि यहाँ की कालिका माँ के दर्शन मात्र से ही भक्तों की हर इच्छा पूरी हो जाती है। नवरात्रि आने पर तो माँ के मंदिर को विशेष रूप से सजाकर तैयार किया जाता है। मां कालिकन मंदिर अपने चमत्कार के लिए जाना जाता है। यह धाम अमेठी के संग्रामपुर ब्लॉक के भौंसिंह पुर गाँव में स्थित है। ...

कृष्ण-गोविंद गीत

        कृष्ण गोविंद गोपाल गाते चलो कृष्ण गोविंद गोपाल गाते चलो, मन को विषयों के विष से हटाते चलो ।। टेक।। देखना इंद्रियों के न घोड़े भगें इनको संयम के दिन-रात कोड़े पढ़ें, अपने रथ को सुमारग लगाते चलो ।।कृष्ण०।। 1 काम करते रहो,  नाम जपते रहो कृष्ण प्यारे का तुम ध्यान धरते रहो, पाप की वासनाएं मिटाते चलो ।।कृष्ण०।। 2 याद आवेगी उनको कभी न कभी दर्श देवेंगे आकर कभी न कभी , ये ही विश्वास मन में जमाते चलो ।।कृष्ण०।। 3 दुःख में तड़पो मती सुख में फूलो मती प्राण जाए मगर नाम भूलो मती नाम धन का खजाना बढ़ाते चलो ।।कृष्ण०।। 4 नाम जप जप के भक्तों ने पाई गती कृष्ण प्यारे इसी से करें विनती, कृष्ण प्यारे को मन में रिझाते चलो ।।कृष्ण०।। 5                    ★★★★★★★★

श्री बनकटी हनुमान जी , Varanasi, UP

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ये पवित्र श्री  हनुमानजी का अत्यंत प्राचीन मंदिर  वाराणसी  , उत्तर प्रदेश के दुर्गाकुंड  मंदिर के ठीक पीछे स्थित है ।  यह एक सिद्ध स्थल है । यहां पर कभी बहुत घना जंगल था । ऐसी मान्यता है कि वन की ठंडक का आभास कर  प्रभु अयोध्या से लौटते  समय विश्राम के लिए यहां रुक गए थे ।  समय के साथ जंगलों की कटाई जब हुई तो इसके  कारण  लोगों को हनुमान जी की मूर्ति  मिली । इसलिए इसका नाम बनकटी हनुमान जी पड़ा ।  मान्यता क्या है ?  यहां पर तुलसीदास जी प्रेरणा पाने और शान्ति के लिए  रुके थे । यहां मूर्ति देख कर पूजा पाठ करने लगे । श्री हनुमानजी ने फिर प्रसन्न हो कर इनको कोढ़ी के  रूप में दर्शन दिया और मागदर्शन किया ।  चूंकि तुलसीदास जी ने लगातार 41 दिनों तक दर्शन किया था और उनकी इच्छा पूरी हुई थी । तभी से 41 दिनों के दर्शन का चलन या व्रत का प्रदुर्भाव प्रारम्भ हुआ ।  यहीं पर पण्डित मदन मोहन मालवीय जी ने बीएचयू बनाने के लिए एक पंडित जी के बताने पर लगातार 41 दिनों तक दर्शन - पूजा  किया और बीएचयू जैसे विशाल म...

माहात्म्य विंध्यवासिनी देवी, अष्टभुजा का , मिर्जापुर यूपी

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पौराणिक आख्यान :1:   विंध्यवासिनीदेवी अष्टभुजा            भगवान श्रीकृष्ण की माता का नाम देवकी था। जब मथुरा के कारागार में देवकी के गर्भ से अष्टम पुत्र के रूप में भगवान श्रीकृष्ण का जन्म हुआ तो उसी दौरान गोकुल में यशोदा मैया के यहां एक पुत्री का जन्म हुआ। वसुदेवजी बालकृष्ण को लेकर कारागार से निकलकर यमुना पार कर गोकुल पहुंचे और उन्होंने उसी रात को बालकृष्ण को यशोदा मैया के पास सुला दिया और वे उनकी पुत्री को उठाकर ले आए। यह कार्य भगवान की माया से हुआ।  गर्गपुराण के अनुसार भगवान कृष्ण की मां देवकी के सातवें गर्भ को योगमाया ने ही बदलकर कर रोहिणी के गर्भ में पहुंचाया था, जिससे बलराम का जन्म हुआ। बाद में योगमाया ने यशोदा के गर्भ से जन्म लिया था। भगवान विष्णु की आज्ञा से माता योगमाया ने ही यशोदा मैया के यहां पुत्री रूप में जन्म लिया था।इसका बाद में नाम एकानंशा रखा गया था।   कंस से बालकृष्ण को बचाने के लिए ही योगमाया ने जन्म लिया था। श्रीमद्भागवत पुराण की कथा अनुसार देवकी के आठवें गर्भ से जन्में श्रीकृष्ण को वसुदेवजी ने कंस से बचाने के ल...

हनुमान जी के 12 नाम और उनके लाभ

 Ye kiu padhate hai, sune aur samjhe. आठ सिद्धियों और नौ निधियों के दाता हैं हनुमान जी महाराज। धार्मिक ग्रंथों में कहा गया है कि उनके 12 नामों के स्मरण मात्र से आपके सारे कष्ट दूर हो जाएंगे और आपको समस्त सांसारिक सुखों की प्राप्ति भी होगी।  वो 12 नाम हैं -  1- हनुमान  2- अंजनी सुत  3- वायु पुत्र  4- महाबल  5- रामेष्ठ  6- फाल्गुण सखा  7- पिंगाक्ष 8- अमित विक्रम  9- उदधिक्रमण 10- सीता शोक विनाशन  11- लक्ष्मण प्राण दाता  12- दशग्रीव दर्पहा ये बहुत ही लाभकारी है। नीचे दी गई लिंक को कॉपी करें और यू ट्यूब पर सुनें। https://youtu.be/Dmo9I1OcT4k

जल(दान) या पानी पिलाना

जल दान को बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि जल दान से  न केवल खुद को आत्म संतोष मिलता है बल्कि प्यासे लोगों को पानी पीने से मिलने वाली तृप्ति से आपके धन्यधान्य में भी वृद्धिृ होती है। हर धर्म में भूखे को भोजन देना और प्यासे जीव को पानी पिलाकर तृप्त करना धर्म पालन में श्रेष्ठ कर्तव्य माना जाता है।  जल का दान, प्यासे को पानी पिलाने के लिए प्याऊ लगाना, पंखा दान जो ठंडी हवा देता है, कड़ी धूप से बचने के लिए छायादार स्थान बनाना, धूप से तपती जमीन से पैरों को बचाने के लिए पदयात्रियों को जूते-चप्पल या पादुका देना तथा भोजन कराने से पुण्य लाभ मिलता है।

वासुदेव या पीपल वृक्ष

 जलाशयके समीप पीपलका वृक्ष लगाकर मनुष्य जिस फलको प्राप्त करता है, वह सैकड़ों यज्ञोंसे भी नहीं मिल सकता । प्रत्येक पर्वके दिन जो उसके पत्ते जलमें गिरते हैं, वे पिण्डके समान होकर पितरोंको अक्षय तृप्ति प्रदान करते हैं तथा उस वृक्षपर रहने वाले पक्षी अपनी इच्छाके अनुसार जो फल खाते हैं, उसका ब्राह्मण- भोजनके समान अक्षय फल होता है । गर्मी के समयमें गौ, देवता और ब्राह्मण जिस पीपलकी छायामें बैठते हैं, उसे लगानेवाले मनुष्य के पितरों को अक्षय स्वर्ग की प्राप्ति होती है। अतः सब प्रकार से प्रयत्न करके पीपल का वृक्ष लगाना चाहिये। एक वृक्ष लगा देने पर भी मनुष्य स्वर्ग से भ्रष्ट नहीं होता । अतः अपने जीवन में कम से कम एक वृक्ष अवश्य लगाना चाहिए।