वासुदेव या पीपल वृक्ष
जलाशयके समीप पीपलका वृक्ष लगाकर मनुष्य जिस फलको प्राप्त करता है, वह सैकड़ों यज्ञोंसे भी नहीं मिल सकता । प्रत्येक पर्वके दिन जो उसके पत्ते जलमें गिरते हैं, वे पिण्डके समान होकर पितरोंको अक्षय तृप्ति प्रदान करते हैं तथा उस वृक्षपर रहने वाले पक्षी अपनी इच्छाके अनुसार जो फल खाते हैं, उसका ब्राह्मण- भोजनके समान अक्षय फल होता है । गर्मी के समयमें गौ, देवता और ब्राह्मण जिस पीपलकी छायामें बैठते हैं, उसे लगानेवाले मनुष्य के पितरों को अक्षय स्वर्ग की प्राप्ति होती है। अतः सब प्रकार से प्रयत्न करके पीपल का वृक्ष लगाना चाहिये। एक वृक्ष लगा देने पर भी मनुष्य स्वर्ग से भ्रष्ट नहीं होता । अतः अपने जीवन में कम से कम एक वृक्ष अवश्य लगाना चाहिए।
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