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हनुमान जी के 12 नाम और उनके लाभ

 Ye kiu padhate hai, sune aur samjhe. आठ सिद्धियों और नौ निधियों के दाता हैं हनुमान जी महाराज। धार्मिक ग्रंथों में कहा गया है कि उनके 12 नामों के स्मरण मात्र से आपके सारे कष्ट दूर हो जाएंगे और आपको समस्त सांसारिक सुखों की प्राप्ति भी होगी।  वो 12 नाम हैं -  1- हनुमान  2- अंजनी सुत  3- वायु पुत्र  4- महाबल  5- रामेष्ठ  6- फाल्गुण सखा  7- पिंगाक्ष 8- अमित विक्रम  9- उदधिक्रमण 10- सीता शोक विनाशन  11- लक्ष्मण प्राण दाता  12- दशग्रीव दर्पहा ये बहुत ही लाभकारी है। नीचे दी गई लिंक को कॉपी करें और यू ट्यूब पर सुनें। https://youtu.be/Dmo9I1OcT4k

जल(दान) या पानी पिलाना

जल दान को बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि जल दान से  न केवल खुद को आत्म संतोष मिलता है बल्कि प्यासे लोगों को पानी पीने से मिलने वाली तृप्ति से आपके धन्यधान्य में भी वृद्धिृ होती है। हर धर्म में भूखे को भोजन देना और प्यासे जीव को पानी पिलाकर तृप्त करना धर्म पालन में श्रेष्ठ कर्तव्य माना जाता है।  जल का दान, प्यासे को पानी पिलाने के लिए प्याऊ लगाना, पंखा दान जो ठंडी हवा देता है, कड़ी धूप से बचने के लिए छायादार स्थान बनाना, धूप से तपती जमीन से पैरों को बचाने के लिए पदयात्रियों को जूते-चप्पल या पादुका देना तथा भोजन कराने से पुण्य लाभ मिलता है।

वासुदेव या पीपल वृक्ष

 जलाशयके समीप पीपलका वृक्ष लगाकर मनुष्य जिस फलको प्राप्त करता है, वह सैकड़ों यज्ञोंसे भी नहीं मिल सकता । प्रत्येक पर्वके दिन जो उसके पत्ते जलमें गिरते हैं, वे पिण्डके समान होकर पितरोंको अक्षय तृप्ति प्रदान करते हैं तथा उस वृक्षपर रहने वाले पक्षी अपनी इच्छाके अनुसार जो फल खाते हैं, उसका ब्राह्मण- भोजनके समान अक्षय फल होता है । गर्मी के समयमें गौ, देवता और ब्राह्मण जिस पीपलकी छायामें बैठते हैं, उसे लगानेवाले मनुष्य के पितरों को अक्षय स्वर्ग की प्राप्ति होती है। अतः सब प्रकार से प्रयत्न करके पीपल का वृक्ष लगाना चाहिये। एक वृक्ष लगा देने पर भी मनुष्य स्वर्ग से भ्रष्ट नहीं होता । अतः अपने जीवन में कम से कम एक वृक्ष अवश्य लगाना चाहिए। 

Sita Ram

  Sitaram nam ka apna mahtv hai. Ye vo naam hai jise kabhi bhi liya ja sakta hai. Aap chahe kahin ja rhen ho ya kuchh kha rhen ho ya bed par sone ja rhe ho. Ye apne aap me ek mantra hai. Isko bolne ya jaap karne se . Mansik shanti milati hai.

गायत्री मंत्र का अर्थ

  गायत्री मंत्र 'ऊं भूर्भुव: स्व: तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि। धियो यो न: प्रचोदयात्।। ... इस मंत्र का अर्थ होता है क‍ि 'सृष्टिकर्ता प्रकाशमान परामात्मा के तेज का हम ध्यान करते हैं, और परमात्मा का वह तेज हमारी बुद्धि को सद्मार्ग की ओर चलने के लिए प्रेरित करें।

गायत्री मंत्र के लाभ

 इसको पढ़ने से  उत्साह एवं सकारात्मकता का प्रवाह होता है, त्वचा में चमक आती है, माँस -मदिरा  से घृणा होती है, अच्छे कार्यों को करने की प्रेरणा जागती है, पूर्वाभास होने लगता है, आर्शीवाद देने की शक्ति बढ़ती है, नेत्रों में तेज आता है, स्वप्र सिद्धि प्राप्त होती है, क्रोध को नियंत्रित करने में सहायता मिलती है, ज्ञान की वृद्धि होती है और कल्याण करने की भावना जगती है। 

गायत्री-मंत्र

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मन्त्र की महिमा                                           सर्वदा स्मर्णीयम् ।।  ऊँ भूर्भुवः स्व: तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो योन: प्रचोदयात् ।।                     ★★★★★★